मेरी ब्लॉग सूची

गुरुवार, मई 05, 2011

आइना

औरों को नसीहत देता है, मनुज तू!
 कभी खुद भी अमल कर देख.
झूठ ही सोया झूठ ही जागा,
कभी सच की रह पे चल कर देख.                                      
 नीद में सपने सबने देखा,
कभी जागती आँखों के सपने देख.
दिन उजियारा जग में फैला,
रात को दिन में बदल कर देख.
खून के रिश्ते अपने होते हैं,
कभी दिल के रिश्ते निभा के देख.
लहू से होली खूब है खेली,
काया से अमृत छलका के देख.


शुक्रवार, अप्रैल 29, 2011

सूनापन

आज दिल फिर उदास क्यूँ है?
गीला है आँखों का समन्दर ,
फिर सूखेपन का अहसास क्यूँ है.?
माना पाना ही जन्नत नही,
फिर तेरे जाने  से खालीपन का आभास क्यूँ है?
दिल के बिखरे टुकड़े चुन चुन जोड़ दिए ,
फिर भी इसमे सुराख़ क्यूँ है?
सांसों की डोर प्रेम के धागे से बंधी थी हमने,
आज इसमे हल्की सी दरार क्यूँ है?

सोमवार, जनवरी 10, 2011

प्राइवेट नौकरी

क्या तुम्हे वो रात याद है?


कौन सी रात?

तुम फिर भूल गये!


ओह! ये तुम्हारे भूलने की बीमारी


खैर छोड़ो..


कल की अहमियत समझते हो न तुम!


कल क्या है?


उफ़!


बाबूजी की पुण्यतिथि है


ओह! हाँ याद आया.


काम का इतना दबाव है की...


बाबूजी को गुजरे दो साल हो गये क्या?


याद करने का समय नहीं मिला!


हुं!!!


माँ का फोन आया था.


क्या कहा?


गाँव बुला रही है !


पर छुट्टी नहीं मिलेगी.

बॉस से बात करता हूँ!


प्राइवेट नौकरी है


बार बार छुट्टी नही मिलेगी.


समझती हो ना...

हुम्म!!!!!!

रविवार, जनवरी 02, 2011

सुना है!

सुना है!दुआएं असर करती है,
 अक्सर बद्दुआओं  को असर करते देखा है.
सुना है!पिता के कर्मो की सजा पुत्र को भुगतनी पड़ती है.
अक्सर पुत्र के कृत की सजा पिता को सहते देखा है.       
सुना है!विरानो में बहारें नहीं आती,
हमने अक्सर शमशानों में फूल खिलते देखा है.
         सुना है!मुहब्बत जिंदगी में एक बार होती है,
          अक्सर मुहब्बत का खेल बनते  देखा है.
सुना है!दोस्त दिल के सबसे करीब होता है,
हमने अक्सर दोस्ती को दफ़न होते देखा है.
          सुना है!प्रभु की राह में चलने वाले,
           भौतिकवादी  नही होते,
           हमने अक्सर संतों को अशर्फियों  पे  उंघते देखा है.
                   सुना है! पीढियां रिवाजें   चलाती हैं,
अक्सर रिवाजों तले पीढ़ियों को मरते देखा है.
सुना है!अपना खून अपना ही होता है,
  हमने अक्सर अपनों को अपनों का खून करते देखा है.
सुना है!मुर्दे की जुबां नही होती,
हमने अक्सर जुबां वालों का गूंगापन देखा है.
               सुना है!प्यार में शर्त नही होती,
               हमने अक्सर शर्ते मुहब्बत देखा है.

 

सोमवार, अगस्त 23, 2010

समय

समय नहीं समय के साथ,
हाथ नहीं किसी के हाथ.
आँखों में मैल,ह्रदय में बैर,
अधरों पर झूठी मुस्कान.
भागे मन शहरों से शहरों,
व्याकुल मन स्नेह को तरसे.                                          
नैन एक विश्वास को बरसे
भरोसा अपना अस्तित्व खो रहा,
स्वार्थ हर दमन का साथी
ये तेरा है ,ये मेरा है.
सब मेरा है क्या तेरा है.
सपनो को सच करने को,
 अस्मत को फूंक मुस्कान दिखा.

शनिवार, अगस्त 21, 2010

लिप्सा

उस सृष्टिकर्ता के समक्ष
 रे  मुर्ख मनुष्य
तू ले अपना आविष्कार खड़ा
करवाने सत्कार खड़ा
गगन चुम्बी इमारतें,
परिंदों संग उड़ने की लालसा.
सब कुछ पा लेने की उन्माद में,
बहता आगे चला गया
आत्मश्लाघी बन तुने
अहंकारी अट्ठास किया.
अपनी लिप्सा में अंध ,
देखा सका ना,
तुने खोदी है खाई
प्रभु की इस सुन्दर रचना की,
क्या बीभत्स रूप किया.
मूर्ख मनु  तू नही जानता
उसकी अगली चाल है क्या?
तुने किया है छल प्रकृति से,
तु ही मूल्य चुकाएगा
अपनी वांछा पे संयम रख
उस अदृश्य शक्ति से
नहीं कभी बच पायेगा . 

 

गुरुवार, अगस्त 19, 2010

आह्वान

आओ अर्जुन और आजाद,
आओ भीम और सुभाष,
हिन्दोस्तान की सुनो आवाज़.              
आज मान रखनी है तुमको,
हिंद की उतर रही है ताज.
अपने ही दुशास्सन बनके,
उतार रहे वसुधा की लाज.
अज्ञात वास  अब बहुत हो चुका ,
देश हमारा बहुत रो चुका.
शोणित अपना बहुत खो चुका!
क्षमा,दया,तप,त्याग मनोबल
अलंकार है इस अवनी के
खल ने किये घात पर घात
करनी उनकी अक्षम्य  हो गयी.
आई अब कृपाण,गदा की बारी,
देखेगी फिर दुनिया सारी!
आओ गाँधी आओ साईं
जिनके हाथों देश सौंप गए
निर्लज्जों ने दुर्दशा बनायीं
जाके तुम परलोक बैठ गये,
मर्कट,गर्दभ,उलूक छोड़ गये,
आ भी जाओ देश पुकारे
तुम सा कोई संत कहाँ अब
लालच का कोई अंत कहाँ अब
ऐसा कोई संत नही है
जिसकी न हो काली कमाई
आओ राम आओ हनुमान
रावण आज घर-घर में बैठे
कैसे सीता लाज बचाए
आओ हनु अब तुमरी आस है
सिय की मान अब तुमरे हाथ है
महावीर बस तुम ही कर सकते
वैदेही की टोह ले आओ
हम कब से है टेर लगाते,
सुनो राम सिय हिय रोये.

                                                                            


                                                   

                       

बुधवार, अगस्त 18, 2010

प्रेम

 प्रेम  जीवन का आधार,
इसकी लीला अनंत-अपार.
प्रेम हो कृष्ण -राधे सा,
शिव गौरी का साहचर्य था जैसे
प्रीत चकवा चकोर  है करता
आस्था देख राम की सबरी पर,
प्रेम के वश में कौन नहीं है,
प्रेम के हैं रूप अनेक,
सब्र अहिल्या का कैसे भुला तू.
विश्वास द्रौपदी के कृष्ण थे,
प्रेम के वश में मुरली मनोहर,
बने पार्थ के सारथी सहचर,
कण कण में विश्वास माँगता,
प्रेम डगर है त्याग चाहता
इस भाव का ओर न छोर,
प्रेम चक्षु से देखो गर तुम,
 कण कण में फैली चहुँ ओर
दोनों हाथों से समेट लो
ह्रदय- ह्रदय निर्मल बसंत हो.
 .

सोमवार, अगस्त 16, 2010

नारी

नारी है  नर का आधा,

पर वो उसकी हर राह में बाधा

प्यार से तकरार से,

डरता है वो अपनी हार से

फिर भी कहता ,

साथ हूँ तेरे मन कर्म और विचार से

खुद पर उसे विश्वास नहीं है,


अहम्  की चादर रखी ओढ़ है ,

पर की नैन से दुनिया देखे, 

नारी के हर रूप से,
  
उसके अहंकार को घात लगी  है.

नर है वो सर्वज्ञ,सर्वेश्वर,

नारी बस उसके अधीन हो. 
                                      




                     



मंगलवार, अगस्त 03, 2010

जननी हूँ


खामोशियों को मेरे कमजोरियां न समझो,खामोश हूँ मेरे अन्दर तूफान उठ रहे हैं.
तुफानो को समेटे अन्तः धधक रहे है,
अधरों के दो किनारे शैलाब को हैं रोके.
इतना न तुम कुरेदो टूट जायेंगे किनारे,
टुटा जो ये किनारा शैलाब ना रुकेगा.
तूफान उठ गया तो ,डोलेगी सारी धरती,
वीरान  हो रहेगी बंजर ये सारी सृष्टि.
जननी हूँ जन्म देना कर्तव्य  है हमारा,
तनया को जन्म देना अभिशाप क्यूँ हमारा.
माता बहन और पत्नी हर रूप का है स्वागत,
पुत्री हो गयी तो क्यूँ कर दिया अनादर.

बुधवार, जुलाई 28, 2010

दुश्मन दोस्त

दोस्ती का भरम टूट गया,
शायद दुश्मनी ही जीने का सबब  बन जाये.
दोस्ती का जाम  छलक गया ,
शायद दुश्मनी ही नशा कर जाये.
सुनते है यारी में दगा  दे गया वो,
अब दुश्मनों से वफ़ा की उम्मीद की जाये.
 दोस्तों ने ठिकाने बदल लिए,
अब दुश्मनों के घर तक राह बनायीं जाये.
दोस्तों के दिलों के अँधेरे से दूर,
अब दुश्मनों के दिलों की आग से रौशनी जलाई जाये.

मंगलवार, मार्च 16, 2010

मैं ओर तुम











निशिगंधा सी मैं,

मस्त बयार से तुम।

हर कलि मे मैं,

अल्हड़ भ्रमर में तुम।

धवल चन्द्रिका मैं,

विकल चकोर से तुम।

अधीर घटा सी मैं,

अटल व्योम से तुम।

अबोध शिशु सी मैं,

पथप्रदर्शक तुम।

नयन नयन में मैं ,

ह्रदय ह्रदय में तुम।

सर्वस्व अर्पण मैं,

पूर्ण समर्पित तुम।

असीम धरा सी मैं,

अनंत छितिज से तुम।

रोम रोम रति मैं,

कण कण कामदेव तुम।


रविवार, फ़रवरी 21, 2010

अपनों का सौदा

अपनों का अपनों से सौदा,
अरमानो को अपनों ने रौंदा।

स्वप्न बह गए पानी बनकर,
नयनो में पलने से पहले।

कलियाँ टूट गयी शाखा से,
सूर्योदय होने से पहले।

अपनों ने मारा अपना बनाकर,
दर्द दे गये दवा बनाकर।

जीवन की उम्मीद दिखाकर,
बद्दुआ दे गये दुआ बना कर।

अपने फिर भी अपने होते है,
अपनों के सौदे होते है।


मंगलवार, फ़रवरी 16, 2010

तुम नही आस पास


अकेली साँझ,अकेली रात
ह्रदय विकल,नैनो में नीर,

तुम नही आस पास
नितांत अकेली मै,

और मेरी तन्हाई


राह तकती आहट की तेरे,

कब होगी भोर

मन कर रहा है शोर

देख तुझे झंकृत होंगे

मन के तार,

कट जाय हर पल,

सह रही हूँ यह असह्य शोर ,

कब होगी भोर
जब आओगे तुम।
लेकर अधरों पर मुस्कान,
पलकों के आलिंगन से बांध ,
बना दोगे हर पल मधुयामिनी सी,
जब तुम होगे आस पास!







अहंकार है चारों ओर

दीवारें दीवारों के बीच,
आंसू से रिश्तों को सींच.
आँखों में ईर्ष्या, ह्रदय में घात
जितने अपने उतने गैर,
अहंकार है चारों ओर!
इंसानों की लाशों पर,
कपडे बदलते लोग।
नम आँखे देख,
करवट बदलते लोग!
शमशानों में खिलते फूल,
गाँव में उड़ते धूल
रुपयों पर बैठी ये दुनिया,
भूखे नंगे,मरते लोग
साँस साँस पर आश लगी है,
आँखे खोले मरते लोग!
आंसू का कोई मोल नही है,
मद में डुबे गिरते लोग!