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सोमवार, फ़रवरी 15, 2010

मै अकेली

मै अकेली,मेरी दुनिया अकेली
सब है पर कोई नहीं!
सबकी दुनिया,उसकी अपनी
सबके सपने,उसके अपने
अपने में भी कितने अपने!
सबकी जुबां और कान अलग है,
जीने के अरमान अलग है!
औरों पर विश्वास नहीं है
अपनों से कोई आस नहीं है
जिन्दा हैं पर जान नहीं है,
मरना भी आसान नहीं है
रिश्तों में अब प्राण नहीं है
मै हूँ कौन,और मेरा कौन
इन बातों की प्यास नहीं है!

रविवार, फ़रवरी 14, 2010

एक कदम तो चल

चल पाँव बढ़ा एक कदम तो चल,
मिल जाएगी राह तू जरा संभल!
संबल दे मन को अपने, खिल जायेंगे फिर सपने
सपनो को अपने पंख लगा,
चल पाँव बढ़ा,एक कदम तो चल!
टुटा है क्यूँ टूटेगा क्यूँ,
पत्थर तो नहीं जो फिर न जुड़े,
हिम्मत तो कर खुशियों को पकड़
चल पाँव बढ़ा,एक कदम तो चल.
गिर गिर के उठना भाव तेरा,
उठ कर अपने अपनों को मना।
अपने पैरों के निशान बना
रिश्तों का तू अवलम्ब तो बन,
चल पाँव बढ़ा ,एक कदम तो चल !