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शुक्रवार, जुलाई 29, 2011

उसका दर्द

धोखे से धोखा खाया है,
उसे फिर किसी ने रुलाया है.
सपनो ने नज़रें फेरीं है,
किसी हाथ ने अंगुली छुड़ाई है.
दिल में नए अरमान लिए,
वह टूट टूट के जुड़ती है.
फिर कोई पत्थर हाथ लिए,
शीशे से उसके ख्वाबों को,
चूर चूर कर जाता है.
 फिर भी वो हंसती रहती है,
ये कैसी उसकी शक्ति है. 
प्रभु तू, भी इतना कठोर न बन,
कुछ खुशियाँ उसके लिए भी बुन.
क्या वो तेरा अंश नही,
जीना उसका अधिकार नही?




5 टिप्‍पणियां:

  1. "फिर भी वो हंसती रहती है,
    ये कैसी उसकी शक्ति है"

    अच्छा चित्रण

    मैंने में कुछ ऐसे ही कहा है

    हौसले की जैसे कोई खान है
    ऐसी सहनशक्ति को सलाम है

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  2. Sunita ji....
    ek behtareen Rachna ke liye badhaai... likhte rahen... follow kar raha hoon...
    Aakarshan

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रभु तू, भी इतना कठोर न बन,
    कुछ खुशियाँ उसके लिए भी बुन.
    क्या वो तेरा अंश नही,
    जीना उसका अधिकार नही?
    ..jab dard gahraata hai ishwar hi sahan karne kee shakti deta hai..
    bahut badiya prasututi...
    bahut badiya laga aapka blog..
    Haardik shubhkamnayen..

    उत्तर देंहटाएं
  4. bhaut hi khoobsurat rachna hai....dard se saraabore.....

    pahli bar pada aapko....
    join kar rha hun...

    aage bhi mere blog par aapka swaagat hai...

    उत्तर देंहटाएं
  5. plz,
    word verification hata lijiye.....aasaani ho jati hai...

    उत्तर देंहटाएं

आपकी सराहना ही मेरा प्रोत्साहन है.
आपका हार्दिक धन्यवाद्.