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गुरुवार, जुलाई 21, 2011

बिटिया न कीजो

आज  वो नही आई,

 फिर घर पर कुछ हुआ होगा.

फिर किसी ने उसका दिल दुखाया होगा,

उसके रिसते घाव को कुरेदा होगा .

 लड़की होने के ताने दिए होंगे,

रंग रूप कद काठी,से हिन् बताया होगा.

फिर कोई रिश्तों के सौदागर  पधारें होंगे.

उसे चलाकर,उठाकर,बिठाकर, गवाकर,

सिलाई बुनाई,पकवान बनवाए होंगे.

फिर नैन नक्श में कमियाँ गिनवाई होंगी.

अपने सुपुत्र की उपलब्धियों की लिस्ट थमाई होगी,

पिता को बेटी के बाप होने का दर्द समझाया होगा.

सोचकर खबर कर देंगे,ऐसा कह निकल गए होंगे

माँ ने  बढ़ती उम्र की दुहाई दी होगी,

पिता ने दहेज़ की असमर्थता जताई होगी.

आंसुओं में  उसकी चुन्नी  डूब गयी होगी,

मुँह  पर दुप्पटा रख उसने  अपनी आवाज़  दबाई होगी,

उसे बेटी होने पर नफ़रत आई होगी.

"अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो"

 मन ही मन  ईश्वर से  मनाया  होगा.

4 टिप्‍पणियां:

  1. कडवे सच की मार्मिक प्रस्तुति

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  2. Aaj bhi beti ko n jaane yun hi kitne bure daur se gujarna padta hai yai behad dukhdaayee hai..
    aaj bhi padhe-likhe kahlane wale samaj mein aisi dukhad esthiti dekh man ko bahut dukh hota hai... ham sabko is disha mein apne-apne star se nirantar pryas karte rahne chahiye... kam se har koi estri yah soch le to kabhi na kabhi is trasadi khtm ho jaayegi, aisa mera vishwashai..
    saarthak prastuti ke liye aabhar!

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  3. kamaal ka likha hai.....
    hakikat se rubaru karati post....

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आपकी सराहना ही मेरा प्रोत्साहन है.
आपका हार्दिक धन्यवाद्.