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गुरुवार, मई 05, 2011

आइना

औरों को नसीहत देता है, मनुज तू!
 कभी खुद भी अमल कर देख.
झूठ ही सोया झूठ ही जागा,
कभी सच की रह पे चल कर देख.                                      
 नीद में सपने सबने देखा,
कभी जागती आँखों के सपने देख.
दिन उजियारा जग में फैला,
रात को दिन में बदल कर देख.
खून के रिश्ते अपने होते हैं,
कभी दिल के रिश्ते निभा के देख.
लहू से होली खूब है खेली,
काया से अमृत छलका के देख.


1 टिप्पणी:

  1. "कभी दिल के रिश्ते निभा के देख"
    इसी में सब कुछ निहित है - सच्चा सन्देश

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आपकी सराहना ही मेरा प्रोत्साहन है.
आपका हार्दिक धन्यवाद्.