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सोमवार, अगस्त 23, 2010

समय

समय नहीं समय के साथ,
हाथ नहीं किसी के हाथ.
आँखों में मैल,ह्रदय में बैर,
अधरों पर झूठी मुस्कान.
भागे मन शहरों से शहरों,
व्याकुल मन स्नेह को तरसे.                                          
नैन एक विश्वास को बरसे
भरोसा अपना अस्तित्व खो रहा,
स्वार्थ हर दमन का साथी
ये तेरा है ,ये मेरा है.
सब मेरा है क्या तेरा है.
सपनो को सच करने को,
 अस्मत को फूंक मुस्कान दिखा.

3 टिप्‍पणियां:

  1. हर शब्द आज के इंसान का चित्रण करता हुआ - हमें आयना दिखता हुआ कि अब तो सुधर जाओ!

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  2. bahut hi sundafr kavita .. shabdo ke chayan ne bhaavo ko bahut hi accha roop diya hai ..
    BADHAI

    VIJAY
    आपसे निवेदन है की आप मेरी नयी कविता " मोरे सजनवा" जरुर पढ़े और अपनी अमूल्य राय देवे...
    http://poemsofvijay.blogspot.com/2010/08/blog-post_21.html

    उत्तर देंहटाएं

आपकी सराहना ही मेरा प्रोत्साहन है.
आपका हार्दिक धन्यवाद्.