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सोमवार, अगस्त 16, 2010

नारी

नारी है  नर का आधा,

पर वो उसकी हर राह में बाधा

प्यार से तकरार से,

डरता है वो अपनी हार से

फिर भी कहता ,

साथ हूँ तेरे मन कर्म और विचार से

खुद पर उसे विश्वास नहीं है,


अहम्  की चादर रखी ओढ़ है ,

पर की नैन से दुनिया देखे, 

नारी के हर रूप से,
  
उसके अहंकार को घात लगी  है.

नर है वो सर्वज्ञ,सर्वेश्वर,

नारी बस उसके अधीन हो. 
                                      




                     



1 टिप्पणी:

  1. आपने अपनी भावनाएं रखीं - बहुत हद तक सही और सच्ची रचना - समय मिले तो मेरी रचना "असमानताएं" भी पढना

    उत्तर देंहटाएं

आपकी सराहना ही मेरा प्रोत्साहन है.
आपका हार्दिक धन्यवाद्.