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मंगलवार, फ़रवरी 16, 2010

तुम नही आस पास


अकेली साँझ,अकेली रात
ह्रदय विकल,नैनो में नीर,

तुम नही आस पास
नितांत अकेली मै,

और मेरी तन्हाई


राह तकती आहट की तेरे,

कब होगी भोर

मन कर रहा है शोर

देख तुझे झंकृत होंगे

मन के तार,

कट जाय हर पल,

सह रही हूँ यह असह्य शोर ,

कब होगी भोर
जब आओगे तुम।
लेकर अधरों पर मुस्कान,
पलकों के आलिंगन से बांध ,
बना दोगे हर पल मधुयामिनी सी,
जब तुम होगे आस पास!







2 टिप्‍पणियां:

  1. बना दोगे हर पल मधुयामिनी सी,
    जब तुम होगे आस पास!

    बहुत खूब. शब्दोँ का उत्तम प्रयोग.

    बधाई स्वीकारेँ

    सत्य

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आपकी सराहना ही मेरा प्रोत्साहन है.
आपका हार्दिक धन्यवाद्.